
Marigold Cultivation: 50 डिग्री में भी खिल उठेगा गेंदे का फूल, इन खास खास किस्मो की खेती से होगा तगड़ा मुनाफा, जाने A2Z डिटेल्स
Marigold Cultivation: कुछ किसान अब नई राह चुन रहे हैं और अलग-अलग तरह की खेती कर रहे हैं। इस बदलाव की कहानी पलामू और गढ़वा जैसे इलाकों से सामने आ रही है, जहाँ किसान फूलों की खेती करके ज़्यादा मुनाफ़ा कमा रहे हैं। चिलचिलाती गर्मी के बावजूद, किसान फूलों की खेती बहुत सावधानी से कर रहे हैं और अच्छी-खासी कमाई कर रहे हैं।
किसान अंकित कुमार बताते हैं कि जहाँ 35 से 45 डिग्री सेल्सियस के तापमान में दूसरे फूलों की खेती करना मुश्किल हो जाता है, वहीं गेंदे के फूल आसानी से उगाए जा सकते हैं। खासकर, फ्रेंच गेंदे की किस्में गर्मी और सूखे को झेलने में सक्षम होती हैं, जिससे वे किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन जाती हैं एक ऐसा विकल्प जिसे उन्होंने खुद अपनाया है।
Marigold Cultivation: इन खाद का इस्तेमाल करे
गेंदे की खेती से उनकी आमदनी में काफ़ी बदलाव आया है। पारंपरिक फसलों के मुकाबले, इसमें लागत कम आती है और मुनाफ़ा ज़्यादा होता है। किसानों को साल में चार बार फसल काटने का मौका मिलता है, जिससे आमदनी का एक लगातार ज़रिया बना रहता है। इसके अलावा, उनके फूल 45 डिग्री तक के तापमान में भी मुरझाते नहीं हैं। ऐसा करने के लिए, वे गोबर की खाद का इस्तेमाल करते हैं और खेतों की रोज़ सिंचाई करते हैं।
Marigold Cultivation: कीमते
वे आगे बताते हैं कि शादी-ब्याह के मौसम में गेंदे के फूलों की मांग काफ़ी बढ़ जाती है। कीमते मांग के हिसाब से कीमतें ऊपर-नीचे होती रहती हैं; कभी-कभी कीमतें ₹200 से ₹300 प्रति कौड़ी (माप की एक पारंपरिक इकाई) के बीच रहती हैं, तो कभी-कभी बढ़कर ₹1,000 तक पहुँच जाती हैं, जिससे उन्हें लाखों रुपये कमाने का मौका मिलता है।
Marigold Cultivation: चार महीनों में तैयार
गेंदे की एक फसल लगभग चार महीनों में तैयार हो जाती है और इसकी 4 से 5 बार कटाई होती है। इससे किसानों को बार-बार आमदनी करने के मौके मिलते हैं। यही वजह है कि खेती का यह तरीका छोटे और मंझोले किसानों के लिए फ़ायदेमंद साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि अगर किसानों को पानी की सुविधा उपलब्ध हो, तो वे गेंदे की खेती से काफी मुनाफ़ा कमा सकते हैं।
Marigold Cultivation: सरकारी योजना की मदद से मिलेगी सब्सिडी
आजकल झारखंड में कई किसान ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पानी की बचत होती है और यह भी पक्का होता है कि पौधों को नमी की सही मात्रा मिले, जिससे पैदावार बेहतर होती है। इसके अलावा, ‘सिग्नेट गेंदे’ की खेती भी की जा रही है; यह एक ऐसी किस्म है जिससे बहुत कम देखभाल में ही बेहतरीन पैदावार मिलती है। उन्होंने बताया कि एक सरकारी योजना की मदद से, वे ये संसाधन 90% सब्सिडी पर हासिल कर पाए।
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उन्होंने बताया कि जहाँ चिलचिलाती गर्मी में दूसरे फूल खिलना बंद कर देते हैं, वहीं गेंदे के फूल खेतों में पूरी तरह से खिले रहते हैं। इसकी सुंदरता और बाज़ार में इसकी लगातार बनी रहने वाली माँग, इसे किसानों के लिए एक बहुत ही फ़ायदेमंद काम बनाती है। नतीजतन, आज के ज़माने में गेंदे की खेती, खेती के पुराने तरीकों के मुकाबले एक मज़बूत और मुनाफ़े वाला विकल्प बनकर उभर रही है। इसमें बस सही देखभाल और समय-समय पर खरपतवार निकालने और जुताई करने की ज़रूरत होती है।



